बिहारी सतसई download app - DR.SAHIL CLASSES बिहारी सतसई एक मुक्तक काव्य है जिसे कवि बिहारी द्वारा रचा गया था, बिहारी सतसई मुक्तक काव्य, में लगभग 713 दोहे संकलित हैं। इसमें नीति, शृंगार और भक्ति और से संबंधित दोहों की आलोचना का संकलन है। कवि बिहारी जी का पूरा नाम बिहारी लाल है, हिंदी साहित्य में रीति काल के प्रमुख कवि बिहारी लाल की लिखी बिहारी सतसई ने बड़ी प्रसिद्धि है। बिहारी लाल पुराने जवाने के काफी मशहूर कवि थे। उस समय मे कवि के मामले में बिहारी लाल को टक्कर देने वाला कोई नही था। कवि बिहारी लाल कौन थे ? (कवि बिहारी लाल की जीवन परिचय) कवि बिहारी लाल को पुराने समय मे महाकवी का दर्जा दिया गया था। महाकवी बिहारी जी का पूरा नाम बिहारी लाल था । बिहारी जी का जन्म वर्ष 1603 में ग्वालियर के पास...
श्रद्धा सर्ग कामायनी “कौन तुम! संसृति-जलनिधि तीर तरंगों से फेंकी मणि एक, कर रहे निर्जन का चुपचाप प्रभा की धारा से अभिषेक! मधुर विश्रांत और एकांत— जगत का सुलझा हुआ रहस्य, एक करुणामय सुंदर मौन और चंचल मन का आलस्य!” सुना यह मनु ने मधु-गुंजार मधुकरी का-सा जब सानंद, किए मुख नीचा कमल समान प्रथम कवि का ज्यों सुंदर छंद; एक दिन जब मनु विभिन्न विचारों में लीन थे तब अचानक उन्हें ऐसा जान पड़ा कि कोई उनसे यह कह रहा है—“जिस प्रकार समुद्र की लहरें समुद्र में भीषण उथल-पुथल मचाकर सतह से मणियों को निकालकर फेंक देती हैं उसी प्रकार इस संसार रूपी समुद्र की लहरों अर्थात् सांसारिक आघातों से ठुकराए हुए मणि के समान तुम कौन हो? साथ ही जिस प्रकार समुंदर तट पर पड़ी हुई वह मणि अपनी...
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